चोरबजारी,इतना ज़्यादा,मारामारी,इतना ज़्यादा-----(विनोद कुमार पांडेय)

मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने चोरबजारी,इतना ज़्यादामारामारी,इतना ज़्यादाउन्नत देश हो रहा यारोपर बेकारी,इतना ज़्यादामँहगाई बढ़-चढ़ कर बोलेमालगुजारी,इतना ज़्यादानिर्धन की नैनों में देखोहै लाचारी,इतना ज़्यादाचारो तरफ फँसी हैं पब्लिकहाहाकारी,इतना ज़्यादासत्ता-कुर्सी लोभी नेतामें मक्कारी... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद कुमार पांडेय
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[09 Jun 2010 21:08 PM]

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