चाँद: वो बचपन वाला!!

उडन तश्तरी  .... बचपन में गर्मियों में छत पर सोया करते थे. देर रात तक चाँद देखते. उसमें दिखती कभी बुढ़िया की तस्वीर, कभी रुई के फाहे, कभी बर्फ के पहाड़, कभी छोटा होता चाँद और न जाने क्या क्या? एक कल्पना की उड़ान ही तो होती थी बालमन की. मेरे लिए एक खिलौना ही तो था बचपन का... [पूरी पोस्ट]
writer Udan Tashtari

कविता

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[09 Jun 2010 21:00 PM]

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