समीप तेरे मकाँ खोल दी मैंने !
समीप तेरे मकाँ खोल दी मैंने.इक अपनी दुकाँ खोल दी मैंने,चाहे तो जी भर खरीददारी करन चाहे तो फुकां खोल दी मैंने !हुश्न पे जिया जो , हुश्न पे मरेंगा ,वादाखिलाफी न हरगिज करेंगा ,उम्मीदी की जुबाँ खोल दी मैंने,इक अपनी दुकाँ खोल दी मैंने!किसने कहा, कोई ना जानता...
[पूरी पोस्ट]
पी.सी.गोदियाल
my lyrics
27
7
1
6
12
[09 Jun 2010 13:05 PM]



Shuffle








