हाँ भैया हम तो कुत्ते हैं...

दिल की कलम से... जानता हूँ ये कविता कि भाषा नहीं है...पर जो कुछ देख रहा हूँ उसके बाद दिल यही कह रहा है...किसी को बुरा लगे मेरी भाषा से तो क्षमा चाहता हूँ...जहाँ किया मन हवस मिटा ली...नाम बन गया है बस गाली...झुंड बना कर घूम रहे हैं....लोभी अवसर ढूँढ रहे हैं...मन नंगा तन... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
views
102
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
43
[09 Jun 2010 12:45 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix