प्राइवेट कंपनी की नौकरी
अभी लंबे दौरे से लौटा हूं। बैंगलोर, कानपुर,कानपुर देहात, झांसी, ओरछा, ग्वालियर, आगरा वगैरह। पिछले पांच-सात साल में हर छोटे शहर की तस्वीर तो काफ़ी बदली है। लेकिन जीवन की वो धीमी चाल उतनी धीमी नहीं रही छोटे शहरों में भी। हर कोई कहीं दौड़े जाता है।...
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Kishore Ajwani
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[09 Jun 2010 10:37 AM]



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