लखनऊ का सृजन

Hamzabaan हमज़बान रंजना दीन की क़लम से तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचतुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचन जाने कितने ऐसे पल आयेजब भीड़ में होते हुए भीदिखे सिर्फ तुम हीसुना सिर्फ तुमकोतुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचहमें याद रहा कि लंच टाइम हो गयातुमने खाना खाया होगा... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़

कविता

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[09 Jun 2010 09:11 AM]

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