इज्जतदार आम आदमी
वह उदास और परेशान सा मेरे पास आया. उसके चेहरे पर घबराहट के चिन्ह स्पष्ट दिखलाई पड रहे थे. मैने पूछा "क्या हुआ! ये इतने घबराए हुए से क्यूं हो ?"बोला" देख नहीं रहे, चारों तरह क्या हो रहा है. हत्याएं, लूट-खसोट, भुठमेड और गुण्डागर्दी का नंगा नाच हो रहा...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[09 Jun 2010 08:12 AM]



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