तेरी कांपती उँगलियाँ

वीर की कलम से मेरे जबीं पर तेरी कांपती उँगलियाँ, जैसे सूखे फूल पर नाचती तितलियाँ| कितना कुछ समाया था सायों में, गूंजती रही देर तलक खामोशियाँ| मेरे जबीं पर तेरी कांपती उँगलियाँ… ख्यालों से बेपनाह मोहब्बत तक, क्या क्या ना था हमारे दरमियाँ| मेरे जबीं... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[09 Jun 2010 07:45 AM]

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