क्यों…?
खाली रह जाता हूँ मैं, बार-बार । जितना भी तुम भरती हो, मैं खाली होता जाता हूँ । तरल होता जाता हूँ, पल-पल, हमेशा, मैं ठोस होने की कोशिश में ।...
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चंदन कुमार झा
poetry
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[09 Jun 2010 07:08 AM]



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