लो क सं घ र्ष !: आर्थिक जीवन और अहिंसा -2

KABEERA KHADA BAZAR MEIN पिछली तीन चार शताब्दियों से धीरे-धीरे सारी विश्व आर्थिक व्यवस्था इस स्वतः चालित तथाकथित ‘आदर्श,‘ व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। कहा जा सकता है कि यदि ये दावे सचमुच सही हैं तो यह व्यवस्था अहिंसक समाज के मूल्यों पर भी सटीक बैठती नजर आती है। सिद्धांतों... [पूरी पोस्ट]
writer Suman
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[09 Jun 2010 07:30 AM]

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