आप की नज़रों ने समझा, प्यार के काबिल मुझे......आवाज़ 'अदा' की.....

काव्य मंजूषा धड़कन भी कुछ काबू में हो साँस भी अब ज़रा संभलेमेरी जाँ मेरी उम्र भी इस तूफाँ के मुक़ाबिल ठहरेजिस दम देखा था उसने पहली बार नज़र भर केवो लम्हा मेरी ज़ीस्त का इकलौता हासिल ठहरेज़ीस्त=जीवन आवाज़ 'अदा' की.....आप की नज़रों ने समझा, प्यार के काबिल मुझेदिल की ऐ... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[09 Jun 2010 06:38 AM]

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