कविता

उलझन.. एक 'कविता' के सृजन पर पर कुछ पंक्तियाँ....जब सृजनात्मकता 'दिल' से फूट कर 'दिमाग' तक पहुँचती है,जब उसे व्यक्त करने के लिए एक 'बेचैनी' सी पनपती है,जब मन की कल्पना लेने लगती है शब्दों का आकार,तब मेरे दोस्त, होता है एक "कविता" का साक्षात्कार!... [पूरी पोस्ट]
writer Aseem
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[09 Jun 2010 05:08 AM]

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