घर जिस चिराग से जलना हो [नज़्म] – दीपक ...

साहित्यशिल्पी.इन बात घर की मिटाने की करते हैं तो हजारों ख़यालात जेहन में आते हैं बेहिसाब तरकीबें रह-रहकर आती हैं अनगिनत तरीके बार-बार सिर उठाते हैं। घर जिस चिराग से जलना हो तो लौ उसकी हवाओं मैं भी लपलपाती है ना तो तेल ही दीपक का कम होता है ना ही तेज़ी से छोटी होती बाती... [पूरी पोस्ट]
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[09 Jun 2010 03:30 AM]

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