भोजपुरिया कहावतन में नाऊ
अगर रउरा भोजपुरिया समाज, रहन-सहन, खान-पान आदि से पूरा तरे परिचित भइल चाहतानी त बहुते मोटे-मोटे किताब आदि पढ़ले के जरूरत नइखे, जरूरत बा त भोजपुरिया कहावतन के समझे के। इ भोजपुरिया कहावत भोजपुरिया समाज के दरपन हईंसन जवने में रउआँ साफ-साफ भोजपुरिया समाज ओ...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[09 Jun 2010 03:54 AM]



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