संदेशे तब और अब

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** यूँ ही बैठे बैठेयाद आए कुछ बीते पलऔर कुछ ....भूले बिसरे किस्से सुहानेक्या दिन थे वो भी जब ....छोटी छोटी बातों के पलदे जाते थे सुख कई अनजानेदरवाज़े पर बैठ करवो घंटो गपियानाडाकिये की साईकल की ट्रिन ट्रिन सुनबैचेन दिल का बेताब हो जानाइन्तजार करते कितने... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

कविता .संदेशे

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[09 Jun 2010 03:35 AM]

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