कल रुत तुमको तरसाए
नभ में उमड़े घन बड़े बिजली भी बिन बात लड़ेतुम भी रूठे-रूठे से बोलो कैसे बात बढे बूंदे छेड़े जब मुझको हवा दिखाए रंग नए तुम्हे लगा मैं भूल गई तुम भी तो थे संग खड़े मेघ सदा बरसाए मद जब तुम मेरे साथी हो कैसे ना मदहोश हो हम नयन तुम्हारे साकी हो ऐसा ना हो तन...
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Sonal Rastogi
रिश्ते
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[09 Jun 2010 03:10 AM]



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