धरातल

Gulabkothari's Blog मनुष्य प्राणी है पृथ्वी लोक का। हर हाल में जुडे रहना है धरती से। जब छूट जाती है धरती, जीने लगता है देव लोक में, इंद्रियों के सहारे, बुद्धि के सहारे प्राणों के सहारे, तब उखड जाते हैं पांव जमीन से। जवाब देने लगता है शरीर, छूटने लगते हैं सहारे डरने लगता है... [पूरी पोस्ट]
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poemगुलाब कोठारीgulab kothariधरातल

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[09 Jun 2010 01:33 AM]

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