माफ़ कर दो

world of dream मै लिखूं क्या तुझे,क्या कहूं आज अबमेरी आँखों के आंशू नहीं रूक रहे हाथ उठता नहीं,कलम चलती नहींमेरे अरमा मेरी आग में जल रहेआज कैसे कहूं की अब मै ,मै नहींबन्धनों में बधा एक विचारा हूँ मैआज कैसे कहूं तू मुझे भूल जारुढ़िवादी रिवाजों का मारा हूँ मैसाथ जीने... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल पंडित
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[09 Jun 2010 00:37 AM]

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