कल ये कहानी फिर छेड़ेंगे

उम्मीद है बंद करो अब शोर लगती हैं तुम्हारी ये खबरें जान चुका हूं तुम्हारे पुते चेहरों पर झल्लाहट का सारा सच मुझे मालूम है तुम्हारी नेताओं से सांठगांठ की हकीकत मुझे ये भी पता है कि एक हारी लड़ाई लड़ रहे हो तुम सबखुद खरोच रहे हो अपने वजूद को अपने नाखूनों से पैसों की... [पूरी पोस्ट]
writer सुबोध
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[09 Jun 2010 00:32 AM]

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