उधार के रंगों से सपने हसीन नहीं होते
गंडक मेरे होने की साक्षी सिर्फ तुम्हीं हो तुम्हारी ही लहरों से बच कर आया था जब उसने दुपट्टे से खींच लिया था एक मन्नत भी मांगी सर पे भंवर पड़े हैं इसके ये फिर डूबेगा लहरों में तब भी रंग लिया था अपने सपनों कोकिनारे पर खड़े होकर पांव धोती सुहागिनों के आलते...
[पूरी पोस्ट]
ravish kumar
57
7
0
7
20
[08 Jun 2010 23:29 PM]



Shuffle








