वह रीत नहीं दोहरानी है !
जीवन नदिया की धार है, ख्वाइशे बहता पानी है,बयाँ लफ्जों में करूँ कैसे, दो दिलों की कहानी है!पानी में उठ रहे है जो बुलबुले बारिश की बूंदों से,मौसम के कुछ पल और, न खुलने की निशानी है!रुकावटें बहुत सी आयेंगी हमारे सफ़र के दरमियाँ,तू अपने हुश्न को संभाले रख,...
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पी.सी.गोदियाल
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[08 Jun 2010 20:41 PM]



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