तूने ये क्या सितम किया : 'शकील' बदायूनी - तलत महमूद
मैं 'शकील' दिल का हूँ तर्जुमाँ कि मुहब्बतों का हूँ राज़दांमुझे फ़ख्र है मेरी शायरी मेरी ज़िंदगी से जुदा नहींबकौल साहिर लुधियानवी :'जिगर' और 'फ़िराक़' के बाद आने वाली पीढ़ी में 'शकील' बदायूनी एकमात्र शायर हैं जिन्हों ने अपनी कला के लिए ग़ज़ल का क्षेत्र चुना...
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अमिताभ मीत
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[08 Jun 2010 20:44 PM]



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