केहि बिधि मिट्टी से मिट्टी मिल जावे...

जीवन के पदचिन्ह मित्रों,ऐसे ही फुर्सत के कुछ लम्हों में एक ताल के किनारे बैठे हुए, मेरोरियल डे के दिन (मई ५, २०१०) चंद पंक्तियाँ मन में उपजी...उन्हें सूफियाना रंग और विस्तार  देकर प्रस्तुत कर रहा हूँ,  वैसे तो सूफी गीतों पर मेरी कोई पकड़ नहीं हैं... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

सूफ़ी

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[08 Jun 2010 14:00 PM]

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