मैं और मेरी व्यथा

कुछ इधर से  ,कुछ उधर  से मैं अहंकार वाला 'मैं' नहीं   मैं, मेरा मतलब मैं अपने आप को ढोता हुआथका हुआ डरा हुआ जब से जिम्मेवारियों ओढ़ी या उढ़ गयी खुद को भूल गया उनको पूरा करने के संस्कार जो पाए थेपूरा करता रहा उम्र की इस दहलीज़ पर आकर थक गया क्यूँ कीइस पड़ाव पर आकर मैं घर को... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक गर्ग
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[08 Jun 2010 11:27 AM]

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