कोयल
सुबह आँख खुलतेसुनती हूँ कोयल की कूकमुझे कोई अपना याद नहीं आतामैं तो बस कोयल की मिठास और उसके बदलते अंदाज में खो जाती हूँकोयल गाती हैफिर जोर से बोलती हैमैं उसकी हर अभिव्यक्ति को सुनती हूँएक गीत, एक पुकार, एक झल्लाहट ..क्या नहीं होता उसके तेवर में !कहती है...
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रश्मि प्रभा...
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[08 Jun 2010 10:39 AM]



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