मैं बादल की सहेली

शिल्पकार के मुख से हवा है मेरा नाम मैं बादल की सहेलीआकाश पे छा जाती हूँ मैं बनके पहेलीआँधियों ने आ के मेरा घर बसायाआकाश के तारों ने उसे खूब सजायाचली जब गंगा की ठंडी पुरवैयाधुप के आंगन में खिली बनके चमेलीचुपके आ के कान में बादल ने ये कहाभर के लाया हूँ पानी तू धरती पे... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा
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[08 Jun 2010 10:53 AM]

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