रोशनी की तलाश ...

चिंतन मेरे मन का एक गलियाराकुछ अंधेराअपने मे समाये हुयेमै चला जा रहा थाइस गलियारे केबीचो बीच रोशनी की तलाश मेआंखे बडी हुईमन मे एक डरशरीर पर एक सिरहनचेहरे मे सिकनरुकती सी धडकन सहसा एक रोशनीधीमे से गलियारे मेफैलने लगीसब कुछ साफनज़र् आने लगागलियारे का स्वरुप अलग सा थामेरी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[08 Jun 2010 09:23 AM]

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