मैं एक कविता बस छोटी सी
मैं एक कविता बस छोटी सी
हर दिल की तह में रहती हूँ.
भावो से खिल जाऊं मैं
शब्दों से निखर जाऊं मैं
मन के अंतस से जो उपजे
मोती सी यूँ रच उठती हूँ.
मैं एक कविता बस छोटी सी
हर दिल की...
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shikha varshney
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[08 Jun 2010 09:00 AM]



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