ये हमारे ही कर्म हैं, किस मामले में सजा समय पर, और पूरी मिल रही है ?
आज किसलिए रो रहे हैं हम ? "जब बोया पेड़ बबूल का हो आम कहाँ से होय"।ये न्याय व्यवस्था का वृक्ष तो अंग्रेजों ने अपने को छाया देने के लिए लगाया था। जब हम आजाद हुए थे तब ये वृक्ष हमारे नेताओं ने उखाड़ कर एक नया वृक्ष लगाना चाहिए था। जिसके नजदीक जाने पर...
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शंकर फुलारा
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[08 Jun 2010 08:41 AM]



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