तस्वीर और तस्वीर
(किसी भी फोटोग्राफर/कैमरा मैन के लिये) मैं समझता हूँ पालतू कैमरे को बन्दूक रंगो को स्याही अक्षर हैं चेहरे तस्वीरों के किताबी जीवन मेंजीता रहा ज्ज्ज्ज्जूँssssssजीक्क की आवाज में मैने उतारी है चुम्बनों में शामिल आवाज की तस्वीर पानी और हवा में हस्ताक्षर की...
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चन्दन
कविता
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[08 Jun 2010 06:52 AM]



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