तुम्हें याद है वो..................

zindagi तुम्हें याद है वोमौसम की पहलीबारिश में भीगनाऔर इतना भीगनाकि हाथ -पैर और होठों का नीला पड़ जानाफिर ठण्ड से ठिठुरना औरठिठुरते -ठिठुरतेतेरे आगोश मेंसिमट जाना तुम्हें याद है वोजेठ की तपती  धूप में छत पर नंगेपाँव दौड़कर आना... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[08 Jun 2010 07:10 AM]

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