' गर , लेकिन ' ( if n buts )
खुरदरे सफ़र ने मिटा दिए ' गर , लेकिन 'चिकनी सतह पर नहीं टिकता कुछ भी
ज़िन्दगी तेज चली खुशनुमा सफ़र में तोभारी वक़्त जैसे रेंग कर रुक गया हो अभीसारी साजिशें हैं मिट्टी में मिला देने कीकुछ बच रहूँ तो निशाँ बोलें कभीफ़ना होता है जब भी कोईजादुई से टुकड़े बोल...
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शारदा अरोरा
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[08 Jun 2010 04:31 AM]



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