बरबादी की वही पुरानी दास्तान: नहर का पानी खा गया खेती
रायबरेली से लौट कर रेयाज उल हक अपनी फूस की झोंपड़ी में गरमी से परेशान छोटेलाल बात की शुरुआत आसान हो गई खेती के जिक्र से करते हैं. वे कहते हैं, ‘पानी की अब कोई कमी नहीं रही. नहर से पानी मिल जाता है तो धान के लिए पानी की दिक्कत नहीं रहती.’पास बैठे रामसरूप...
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Reyaz-ul-haque
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[08 Jun 2010 03:16 AM]



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