अतीत के आसमान से

दिल से आज बरसों बाद  छत पर लेटकर तारों को देखा  और चाँद को  निहारता रहा देर तक,  अतीत के आसमान में  आज फिर से  सपनों का चाँद  बादलों की ओट से झांकता नज़र आया, चाँद मुझ से शर्मा रहा था  या मैं चाँद से  कहना कठिन... [पूरी पोस्ट]
writer nilesh mathur
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[08 Jun 2010 01:55 AM]

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