आजु पहिली तारीख हS
रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा। करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए पते ना चलुवे। सबेरे उठते मलिकाइन चाय बना के ले उअवी अउर कहुवी की जल्दी से तइयार होके आफिस चलि जाईं। हम कहुँवी की अरे आफिस त 9 बजे खुली, अबे साते बजे आफिस जाके का...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[08 Jun 2010 01:59 AM]



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