तुमको रास मौन की भाषा
मैं मुखरित हर क्षण हर पलतुमको रास मौन की भाषाचाहे सदा ये मन मेरासजा कर स्वर की रंगोली युगल स्वर में लगाएनेह के गीतों की बोलीमैं ललक कर जब पास आता मौन के समक्ष दब जाती पिपासामैं मुखरित हर क्षण हर पलतुमको रास मौन की भाषाइंद्रधनुष से ढेर सारे रंगों को मैं...
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डॉ. राजेश नीरव
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[08 Jun 2010 00:04 AM]



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