भगीरथ की कविताएं
पानी पहाड़ों की विशालकाय चट्टानों सेरिसता पानी‘ओस’ और फर्न के कोमल पौधों के बीच सेरेंगता पानीपहाड़ी झरनों सेगिरता पानीचट्टानों से टकराताबर्फ सा ठंडा जलपानी रिसता है , रेंगता हैगिरता है , पड़ता हैटकराता हैकिंतु , टूटता नहींअपना वजूदबरकरार रखता हैपानीथोर...
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भगीरथ
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[08 Jun 2010 00:06 AM]



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