नरक के रस्ते

एक आलसी का चिठ्ठा …तकिया गीली है।आँखें सीली हैं?आँसू हैं या पसीना ?अजीब मौसमआँसू और पसीने में फर्क ही नहीं !...... कमरे में आग लग गई है।आग! खिड़कियों के किनारेचौखट के सहारे दीवारों पर पसरीछत पर दहकती सब तरफ आग ! बिस्तर से उठती लपटेंकमाल है एकदम ठंडी लेकिन शरीर... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव

hell

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[07 Jun 2010 22:39 PM]

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