हबीब तनवीर : हीरे की अँगूठी
24 अक्टुबर 1995 को आये पूर्ण सूर्यग्रहण ने प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर साब का कविरुप जाग्रत कर दिया था और इन्होने इस अवसर पर निम्नांकित कविता को रचा था। आज हबीब साब को गुजरे हुये एक साल हो गया है। हबीब साब को श्रद्धांजलि उन्ही की कविता दे सकती है। हीरे...
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स्वार्थ
poetryLife24th october 1995akbarpur
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[07 Jun 2010 21:08 PM]



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