जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई आप क्यों रोये.....

काव्य मंजूषा आवाज़ 'अदा' की....जो हमने दास्तां अपनी सुनाई, आप क्यों रोएतबाही तो हमारे दिल पे आई, आप क्यों रोएहमारा दर्द\-ए\-ग़म है ये, इसे क्यों आप सहते हैंये क्यों आँसू हमारे, आपकी आँखों से बहते हैंग़मों की आग हमने खुद लगाई, आप क्यों रोएबहुत रोए मगर अब आपकी खातिर न... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[07 Jun 2010 21:17 PM]

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