सूक्ष्म अलंकार [काव्य का रचना ...

साहित्यशिल्पी.इन देख बिंदु में सिन्धु जब, बिन बोले सुन अंग. इंगित से समझा सकें, उत्तर- समझ प्रसंग. तब भावों का हो सके, अकथनीय विस्तार. सूक्ष्म नाम का हो तभी, पद्य में अलंकार.. किन्हीं काव्य पंक्तियों में प्रसंग विशेष में जब अन्य के भाव को समझकर अभिप्राय विशेष से चेष्टाओं... [पूरी पोस्ट]
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[07 Jun 2010 20:30 PM]

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