मन ही मन वे बिखर रहे थे....!

एक था मुन्ना , एक थी नन्हीं नट्खट मुन्ना, चंचल नन्हीं भाई बहन में कभी न बनती सुबह शाम झगड़े में कटती नए नए खिलौने आते मुन्ने को फिर भी न भाते तोड़-फोड़ करता था मुन्ना फिर भी था मम्मी का बन्ना नन्हीं की थी बस इक गुड़िया वही थी उसकी बस इक दुनिया नन्हे... [पूरी पोस्ट]
writer मीनाक्षी
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[07 Jun 2010 20:15 PM]

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