कविता : तापमान पर करो नियंत्रण

BAL SAJAG बढती जाती ये महगाई,घटती जाती पेड़ पौधों की संख्या भाई।बढती सूरज का तपन भाई,बढती गर्मी होती दिक्कत सारी।चलती लू जलती त्वचा हमारी,होती बीमारी न्यारी।जिसका इलाज न होता जल्दी भाई,सोते रहते घर में भाई।लोग देखे भाई करते रहते छि छि,क्या हो गयी बीमारी इसको।माता... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[07 Jun 2010 15:01 PM]

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