अशोक जमनानी की लघु कथा: पेटदर्द
Share मंत्री जी के पेट में रह-रह कर दर्द उठता। दिन पर दिन बीतते जा रहे थे लेकिन दवा और दुआ दोनों ही बेअसर सिद्ध हो रहीं थीं।अच्छे से अच्छा इलाज़ चल रहा था;...
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माणिक
sahitya
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[07 Jun 2010 05:01 AM]



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