अशोक जमनानी का गीत: ओ पथिक तू चल अकेला

अपनी माटी Shareओ पथिक तू चल अकेला कारवां बन जायेगातू समर पर हो समर्पित; तो अमर हो जायेगाना आंसुओं का अर्ध्य  हो न पीर की परवाह होयश की कोई कामना न पथ में शीतल छांव होतू नींव के पत्थर को अपनी आस्था का दान देनिर्माण का हर कंगूरा तुझसे ही जीवन पायेगायह... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक जमनानी

sahitya

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[07 Jun 2010 05:01 AM]

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