बुद्धि जीवी की जय हो

जीवन के अनमोल रंग हाँ मैं बुद्धि-जीवी हूँ, पर इसमें गलती मेरी नहीं. कुछ ऐसा ही कहा मेरे एक जानकार मित्र ने जब हमारी किसी छोटी सी बात पर कहा-सुनी हो गयी। यूँ तो बुद्धि जीवी होने में कोई बुराई नहीं पर बात यह है की बुद्धि जीवी को अक्सर लोग कुछ अलग ही नज़रिए से देखते हैं। जी... [पूरी पोस्ट]
writer पियूष अग्रवाल

कविता

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[07 Jun 2010 14:56 PM]

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