अनामिका की कविता''तू और मैं ..''

अपनी माटी Share http://anamika7577.blogspot.com/तू और मैं ..मेरे स्वप्नो की छाया में रमी हुईमेरी स्मृतियों में बसीसांसो के धागो में बंधी तू...!और मै.......??तेरी छाया के पीछे दौड़ताएक व्याकुळ, आकुल,बेबस पथिक मात्र हू..!तू अपने ह्र्दय की फुलवारी मेंकिसी और की सोचे... [पूरी पोस्ट]
writer अनामिका की सदाये......

कविता

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[07 Jun 2010 14:13 PM]

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