ताकती है मुझे

पिनाकपाणि मेरी खिड़की के द्वार पर पेड़ की एक टहनी जब तब उल्लास से मेरी आँखों में झांकती है  हवा के झूले में पेंग बढाकमरे में आता है खुशबू का एक झोंकाऔर वहां होती है खुशबू मात्र  कभी दूर से स्थिर ताकती है मुझे नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Pinaakpaani
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[07 Jun 2010 14:19 PM]

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