एक कराह फड़फडाकर उड़ती है

कुमार अम्‍बुज एक कराह फड़फड़ाकर उड़ती हैमिक्लोश राद्नोतीआधी रात के करीब मेरी माँ ने मुझे जन्म दियासुबह तक वह मर चुकी थीजैसे तने से एक कोमल डाल फूटती है उसमें से मैं उगादिन का दुख अभी बाकी थाअपने सिर के नीचे तुम्हारा दायाँ हाथमैं तुम्हारी नब्ज में चलते हुये खून को सुनता... [पूरी पोस्ट]
writer कुमार अम्‍बुज

कविता

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[07 Jun 2010 14:19 PM]

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