हौंसला !

अंधड़ ! इसलिए प्यार है मुझे,इसलिए मिस करता हूँ उन्हें,उन ख़ूबसूरत ऊँचे पहाडो को,जिनके, कहीं चिकने, कहीं खुरदुरे सीनों पर,मरहम की तरह लिपटी,नरम-मुलायम बर्फ जब पिघलकर, बूँद-बूँद आंसुओ की तरह बहकर कहीं ओझल होती है तब भी,अपने ह्रदय को पिघलता छोड़ जग दिखावे को वह दृडता... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[07 Jun 2010 13:33 PM]

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